Category: सरोकार

बतकुच्चन ‍ – ८६

बेमौसम बरसात भा हँसुआ का बिआह में खुरपी के गीत. दिवाली का मौका पर फुलझरी पटाखा का जगहा कादो पानी क खेल होखत बा, जेकरे देखीं उहे केहू ना केहू पर अछरंग लगावे में लागल बा. अछरंग लांछन के कहल जाला, केहू पर दोस लगवला के अछरंग लगावल...

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भ्रष्टाचार से खुशहाली बढ़ेले

– जयंती पांडेय गुरू लस्टमानंद मार मईल कुर्ता धोती अपना बेग में से निकाल के बिगत रहले साफ करेके. अतने में राम चेला अइले. दंडवत क के पूछले, का हो बाबा कई दिन से ना लउकलऽ? कहां चल गइल रहलऽ? बाबा कहले, दिल्ली गइल रहीं. राम...

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बतकुच्चन ‍ – ८५

सँवास, हहास, भड़ास, आ बतास. एह चारो में कवनो आपसी रिश्ता ना होखला का बावजूद आजु के बतकुच्चन एहनी पर करे के बा. बतास के मतलब बहत तेज हवा त होखबे करेला बाकिर ओहु ले खास मतलब होला हवा से पसरे वाला बेमारियन से. फलाना के बतास लाग गइल...

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जिए भोजपुरी! बाकिर कइसे?

ई एगो बड़हन सवाल बा. आ एकर जवाब कवनो एक आदमी ना दे सके. एहसे ई सवाल रउरा सभका सोझा राखत बिया अँजोरिया कि एह सवाल के जवाब खोजल जाव. रउरा सभे से निहोरा बा कि आपन राय विस्तार से अँजोरिया के भेजीं, एहिजा छोटहन कमेंट दे के ना. सभकर...

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मुसीबत खातिर एम डायल करीं

टाइम्स आफ इण्डिया पर एम जे अकबर के ब्लॉग में नयका लेख मनमोहन सिंह के डिनर डिप्लोमेसी पर लिखल गइल बा. अकबर साहब लिखले बाड़न कि आठ साल से बिना कुछ दिहले समर्थन के मलाई काटत मनमोहन एक बेर फेरु मुलायम से समर्थन चाहत बाड़न बिना कुछ...

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