Category: सरोकार

भउजी हो! दमदा त बड़ा दमदार निकलल.

भउजी हो! का बबुआ? दमदा त बड़ा दमदार निकलल. आजुए थोड़े निकलल ह. ऊ त शुरुए से दमदार रहल. ना त अइसन पिरिया बेटी ले के चल जाइत. बाकिर देखते देखत कतना के औकात हो गइल ओकर ! का करे? सास ससुर कुछ दिहले ना कहलें कि ए बबुआ बेटी दे दिहनी...

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बतकुच्चन ‍ – ७९

चोट त चोट ह आ कचोट? कचोट के कम चोट समुझे वाला के बुड़बके बुझे के पड़ी. काहे कि कचोट झलके ना भितरे भितर चोट मारत रहेला. देह के चोट त देर सबेर भुलाइओ सकेला आदमी बाकिर मन के चोट, कचोट, भुलावल बहुते मुश्किल होला. आजु जब लिखे बइठल बानी...

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