भोलानाथ गहमरी जी के लिखल एगो निर्गुन
कवने खोतवा में लुकइलू आहि रे बालम चिरई, आहि रे बालम चिरई. बन बन ढुंढली, दर दर ढुंढलीं, ढुंढलीं नदी...
Read MorePosted by Editor | Aug 15, 2023 | भोजपुरिया लाल, मनोरंजन, सरोकार |
कवने खोतवा में लुकइलू आहि रे बालम चिरई, आहि रे बालम चिरई. बन बन ढुंढली, दर दर ढुंढलीं, ढुंढलीं नदी...
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