मन के अंकगणित
– मीनाधर पाठक का जाने काहें रतिया देर से नींद पड़ल. ऊहो पतोहा, माने सिद्धि कऽ पुकार पर. हम...
Read More– मीनाधर पाठक का जाने काहें रतिया देर से नींद पड़ल. ऊहो पतोहा, माने सिद्धि कऽ पुकार पर. हम...
Read More(एक) बेंड़ल बजर किंवाड़, यार अइले, चलि गइले ! ना सुनि परल पुकार, यार अइले, चलि गइले ! सूरज-चन्दा कऽ...
Read MorePosted by Editor | नवम्बर 29, 2023 | भोजपुरिया लाल, सतमेझरा, सरोकार, साहित्य |
– राम पुकार सिंह ‘पुकार’ गाजीपुरी प्रकृति कऽ अलगे-अलगे रूप में अनुभूति भइल, ओकरा...
Read More– भरत मिश्रा ऊ कइसे लिखिहे चिट्ठी हमरा के जमाना का दौड़ में फोन आ गइल. हम सोचनी जा के मिलब...
Read More– संतोष पटेल हाथी त अब रहल ना, बाकिर सीकड़ बाचल बा. नदी त सूख गइल, अब कीचड़ बाचल बा. नीक रहे...
Read More