उदय शंकर के दू गो कविता
(1) नून इक दिन बहुत हाहाकार मचल भात, दाल, तरकारी में। काहे भैया नून रूठल बा बइठक भइल थारी में।...
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Read MorePosted by Editor | May 7, 2022 | पुस्तक चर्चा, भाषा, सरोकार |
हिन्दी भाषा परिवार में बड़की बहिन होखला का बावजूद भोजपुरी भाषा के जवन सरकारी उपेक्षा हो रहल बा ओह...
Read Moreमुक्तेश्वर तिवारी ‘बेसुध’ (चतुरी चाचा) नाँव सुनिके चिहुकीं, चिहाईं जनि. मलेरिया, फाइलेरिया,...
Read Moreइंदिरा राय अम्मा के सहेलियन के एकाध सिसकी, बहरि बाँस के टिकठी बनावे के ठक-ठक आवाज आ बीच-बीच में...
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