निर्गुण आ भजन – गोपाल दूबे
निर्गुण – देह दुनिया भरम ह बलवान करम गति,भीतरी के सांच भीतरीये पहचान ले,बुद्धि कुबुद्धि के...
Read Moreनिर्गुण – देह दुनिया भरम ह बलवान करम गति,भीतरी के सांच भीतरीये पहचान ले,बुद्धि कुबुद्धि के...
Read Moreविष्णुदेव तिवारी फूआ, माने गिरिजा फूआ-पुरुषोत्तम के बाबूजी के छोटकी बहिन- बाति ए तरी पागेली जे...
Read Moreअशोक द्विवेदी चितकबरा पहाड़ का अरियाँ अरियाँ जवन ऊँच-खाल डहरि ओने गइल रहे, ओकरा दूनो ओर छोट-बड़ गई...
Read Moreअनिल ओझा ‘नीरद’ (एक) दोसर का बूझी इहवाँ, दोसरा के बेमारी?ऊ त बूझऽतारी चीलम, जेह पर चढ़ल बा अँगारी।।...
Read Moreआचार्य अंबिका दत्त त्रिपाठी ‘व्यास’ हम जनम भर केहू के मनावत रहीं,केहू माने न माने त हम...
Read More