तहार सुधि
– डा॰अशोक द्विवेदी कतना हो जाला मनसायन सुधि का सुगंध से गमक उठेला जब बतास छान्ही पर एकदम ओलरि आवेला अकास सचहूँ कतना हो जाला मनसायन तहरा सुधि से हमरा भीतर कोना-अँतरा ले एक-ब-एक भर उठेला उजास! तहार सुधि अवते लहरे लागेला ताल...
Read More– रामरक्षा मिश्र विमल लहरे तिरंगा सजि धजि पूरा देशवा में पसरेले अङना दुअरिया अँजोरिया हरियर धरती चंदनिया पियर बीचे गह गह सगरी बधरिया अँजोरिया. असहीं आजाद हिंदुस्तान रहे जुग-जुग सगरी जहान फइलावे के अँजोरिया. आन बान शान...
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