Category: सतमेझरा

कमजोर औरतन का देश में फूहड़ “स्लट वाक”

– जयंती पांडेय अखबारन में पढ़ि के आ फोटो देखि के रामचेला पुछले बाबा लस्टमानंद से कि, का हो बाबा ई जे सुनाऽता “स्लट वाक” से का हऽ ? कामिल बाबा के डिक्शनरी में त लिखल बा स्लट माने फूहरि मेहरारू, कुलटा, कुतिया आ...

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सपना में भेँटइले बाबा गाँधी

– जयंती पांडेय अगस्त के पहिलका हफ्ता बीतत रहे. आजादी के ६४वाँ जलसा में खाली एक हफ्ता बाकी रहे. एह में बाबा लस्टमानंद के एक दिन रात में सपना में गाँधी बाबा भेंटा गइले.एगो गाछ के नीचे बइठल रहले, आँखि भारी लागत रहे, लीलार पर...

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काला धन करिये काहे कहाला

– जयंती पांडेय रामचेला बाबा लस्टमानंद से सवचले कि, हो बाबा, ई कालाधन के करिये काहे कहल जाला गोर चाहे गेहूँआ काहे ना कहल जाला ? हम त कव हाली अपना बगली के नोट बड़ा धेयान से देखनीं कि एहमें से कवनो करिया बा का ? लेकिन कवनो...

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अपना देश में घटना के बाद के रस्म

– जयंती पांडेय असल में हमनी के देश, माने हमार भारत महान, एगो दुर्घटना प्रधान आ विस्फोट प्रधान देश ह. इहां कवनो महीना बांव ना जाला जब कवनो घटना चाहे दुर्घटना चाहे विस्फोट ना होखत होखे. एगो घटना अबहीं होखबे करेला कि दोसरको...

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एतना उतार चढ़ाव में सांच कहाँ ?

– जयंती पांडेय बात चलल लस्टमानंद से कि साँच का होला. बाबा कहले साँच त हमरा के लइकाईं से हरान कइले बा. लईकाईं में पढ़नी कि बुद्ध आ महाबीर साँच के खोज में घर बार त्याग दिहले. बाकी ए घरी त साँच के खोजे खातिर दुनिया भर के जाँच...

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