दू गो गजल Posted by Editor | सितम्बर 2, 2011 | कविता, साहित्य | – रामरक्षा मिश्र विमल 1 शहर में घीव के दीया जराता रोज कुछ दिन से सपन के धान आ गेहूँ बोआता जोग कुछ दिन से जहाँ सूई ढुकल ना खूब हुमचल लोग बरिसन ले ढुकावल जात बाटे फार ओहिजा रोज कुछ दिन से छिहत्तर बेर जुठियवलसि बकरिया पोखरा... Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..