टैग: गीत

फागुन के तीन गो गीत

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एक लागेला रस में बोथाइल परनवा ढरकावे घइली पिरितिया के फाग रे ! धरती लुटावेली अँजुरी से सोनवा बरिसावे अमिरित गगनवा से चनवा इठलाले पाके जवानी अँजोरिया गावेला पात पात प्रीत के बिहाग रे. पियरी पहिरि...

Read More

गीत

– डा॰अशोक द्विवेदी रतिया झरेले जलबुनिया फजीरे बनि झालर, झरे फेरु उतरले भुइयाँ किरिनिया सरेहिया में मोती चरे ! सिहरेला तन, मन बिहरे बेयरिया से पात हिले रात सितिया नहाइल कलियन क, रहि-रहि ओठ खुले फेरू पंखुरिन अँटकल पनिया चुवत...

Read More

Recent Posts

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..