एन.आर .आई Posted by Editor | जून 13, 2011 | कविता, साहित्य | – डॉ. कमल किशोर सिंह परदेसवा के पीड़ा का सुनाईं ऐ भईया . जिया चारा जस जाला छटपटाई ऐ भईया. जिनगी लागे एगो लमहर लड़ाई ऐ भईया, चोट कहाँ-कहाँ लागल का बताईं ऐ भईया . घाव दिलवा के देला ना दिखाई ऐ भईया , बाकी छिपे नाहीं कतनो... Read More
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