रोवे के रहलीं तले अँखिए खोदा गइल
सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-65 आइल भोजपुरिया चिट्ठी रोवे के रहलीं तले अँखिए खोदा गइल आजु लभेरन...
Read Moreसोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-65 आइल भोजपुरिया चिट्ठी रोवे के रहलीं तले अँखिए खोदा गइल आजु लभेरन...
Read Moreसोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-64 आइल भोजपुरिया चिट्ठी लटकलऽ कि गइलऽ बेटा आजु लभेरन बहुत देर से...
Read More–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल #भोजपुरिया-चिट्ठी #भोजपुरी #जाड़ #रजाई #डॉ.रामरक्षा-मिश्र-विमल...
Read More–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल #भोजपुरिया-चिट्ठी #भोजपुरी #नया-साल #सऽमत #डॉ.रामरक्षा-मिश्र-विमल...
Read More– डा॰ रामरक्षा मिश्र विमल होली, होरी भा फगुआ जवन कहीं, हटे एकही. साँच पूछीं त हम एह अवसर पर रंग खेलला आ हुड़दंगई के पक्षपाती हईं. जइसे बियाह शादी का अवसर पर मेहरारुन के गारी गावल हमरा बिल्कुल वैज्ञानिक लागेला, ओसहीं फगुआ के...
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