टैग: नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती

एही शौचालय की कारन ही ससुरा त्याग, नैहर में लौट गइली दुलहिनिया

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती बदली समाज अब स्वच्छता अभियाने से, जागरुक होत हई घर-घर बबुनिया. बाबुजी हमरा के ओइजा ना बिअहब, जवना घरे बनल ना होई लैटिनिया. देखीं महराजगंज प्रियंका सखी का कइली, ससुरा के छोड़ मायका गइली...

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अइसे ही जब कोख मराई, रंडुहा रहि जइहें कई भाई

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती प्रकृति क व्यवस्था में जीवन के गाड़ी खातिर दु पहिया जरूरी बतावल गइल. समाज के लोग संतति बढ़वला में सावधानी ना बरती त सामाजिक संरचना गड़बड़ा जाई. जेतने लईका ओतने लईकी रही त सामाजिक ताना-बाना बनल...

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जबसे आइल बा मनरेगा, खेतिहर मजदूर मिलल दुश्वार हो ग‎इल

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मनबोध मास्टर बहुत परेशान भइलें. खेत में खाड़ पाकल-फूटल फसल खड़ा रहल, कटिया खातिर मजदूर ना मिले. अरे भया! मजूर कहां से मिली? सब हजूर हो गइलन. दिल्ली-मुंबई जाके खटिहें लेकिन गांव में खटला में शरम...

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‘सूर्पनखा’ का नाक के चलते असों होली ना मनाइब.

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मनबोध मास्टर दुखी मन से कहलें – असों होली ना मनाइब. मस्टराइन पूछली- काहें? ऊ कहलें – सूर्पनखा की नाक की चलते. बात सही बा. जहां-जहां गड़बड़ बा, बूझीं सूर्पनखा के नाक फंसल बा. हम्मन क...

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महानगर अउर जिलन के, का बतलाई हाल?

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मंदिर में मंथन भइल, मिली जाम से मुक्ति? जाम-झाम क नाम पर, आपन-आपन युक्ति.. नगर निगम में धांधली, गेट में ताला बंद. लाठी चार्ज में बहल लहू,ऊपर से शांतिभंग.. महानगर में रोज मिलें, मरल-परल नवजात....

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