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होली के हुड़दंग : लोक साहित्य का संग

– डा॰ रामरक्षा मिश्र विमल होली, होरी भा फगुआ जवन कहीं, हटे एकही. साँच पूछीं त हम एह अवसर पर रंग खेलला आ हुड़दंगई के पक्षपाती हईं. जइसे बियाह शादी का अवसर पर मेहरारुन के गारी गावल हमरा बिल्कुल वैज्ञानिक लागेला, ओसहीं फगुआ के...

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भउजी हो !

का बबुआ ? फगुआ आ गइल का ? लउकल त ना हऽ केनियो. बाकिर सुने में आवत बा कि आ गइल बा. ओकरे के खोजे निकलल बानी. चलीं, एही बहाने भउजी त याद आ गइली. ना त अब त जमाना बा अपने मरद मेहरारू में भूलाइल रहे के. बाप महतारी, भाई भउजाई, बहिन...

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होलिका दहन आ फगुआ का दिन खातिर कुछ अनुभूत सात्विक प्रयोग

– वैभव नाथ शर्मा फगुआ भा होली वसंत ऋतु में मनावल जाये एगो महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार ह. हिंदू पंचांग का अनुसार होली फागुन महीना के पुरनमासी के मनावल जाला. रंग के त्योहार कहल जाये वाला ई पर्व पारंपरिक रूप से दू दिन के पर्व...

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