फूहड़ता लेके खाली भोजपुरी के बदनामी काहे.. भाग २

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” जमाना लाख बुरा चाहे त का होला, उहे होला जे मंजूरे खुदा होला. निकलल बानी सर कफ़न बांध के याद रखीह, मिट जाई हर रावन बस लक्ष के धियान धरीह, बा सेवा के इरादा त बोली के दरकिनार करीह,...

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