भउजी हो !
भउजी हो ! – कइसन भउजी, केकर भउजी ? बाप हो, आजु त अगिया बैताल बन गइल बाड़ू. माफ क द. – बुझा गइल आपन गलती ? हँ. बाकिर जवन भइल तवन मजबूरी में. फगुआ में ससुरारी चल गइल रहीं आ ओहिजा नेटवर्के ना रहुवे. -ई बहानेबाजी चलेवाली...
Read Moreभउजी हो! का बबुआ ? हई उन्नाव में सरकार सोना खातिर खोदाई काहे करवावत बिया? हम त रउरा के अतना बुड़बक ना बूझत रहीं. ई का? हम तोहरा से सवाल पुछनी त तू हमरा के बूड़बक बतावे लगलू। त रउरे बताईं उन्नाव कहाँ बा? कानपुर का लगे. आ कानपुर में...
Read Moreभउजी हो! का बबुआ? ई कांग्रेसिया प्रियंका के नाम सुन के अतना भड़कत काहे बाड़े सँ? भड़के वाली बात बा से भड़कत बाड़े स. बुझनी ना. बूझब कइसे? रउरे सभ के आग लगावल ह. कांग्रेसिया सब बूझत बाड़े. अच्छा मान ल कि प्रियंका राजनिति के मैदान में...
Read Moreभउजी हो! का बबुआ? शौचालय पहिले कि देवालय? का बाति बा? पेट खराब हो गइल बा का? ना भउजी. राजनीति में एह घरी एही पर बहस चलत बा त सोचनी काहे ना तहरा से पूछीं कि कवन पहिले? ए बबुआ, हम त इहे जनले बानी कि दिशा मैदान, शौच कर्म पूरा कइला...
Read Moreभउजी हो! का बबुआ? सोचतानी तोहरा ला एगो पुरस्कार के जोगाड़ करीं. कइसन पुरस्कार? इनामो मिली का ? पुरस्कार के नाम होखी “महान भउजी सम्मान” बाकिर अबहीं कवनो संस्था से सउदा नइखे बन पावत. आ इनाम त खैर का मिली हँ पइसा कम से...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..