भोजपुरी उपन्यास बनचरी के विमोचन
मुम्बई का विले पार्ले स्थित “नवीन भाई ठक्कर सभागार” में “अभियान” संस्था का सहयोग से आयोजित ‘सबरंग फिल्म स्टार सम्मान समारोह’ आ ‘भोजपुरी पंचायत’ वार्षिकोत्सव का अवसर प डा0 अशोक...
Read MorePosted by Editor | अगस्त 30, 2015 | उपन्यास, पुस्तक चर्चा, सरोकार, साहित्य |
मुम्बई का विले पार्ले स्थित “नवीन भाई ठक्कर सभागार” में “अभियान” संस्था का सहयोग से आयोजित ‘सबरंग फिल्म स्टार सम्मान समारोह’ आ ‘भोजपुरी पंचायत’ वार्षिकोत्सव का अवसर प डा0 अशोक...
Read More– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) घर का फोन में एसटीडी रहे. पूजा नम्बर मिलावे लगली. दूनो बच्चा दूर पलंग पर बैठ के शून्य में निहारे लगले. विपत्ति महसूस करेके क्षमता बच्चन में बड़कन से अधिके होला. बहुते...
Read More– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) मुजफ्फरपुर इमलीचट्टी होके ऊ यूनिवर्सिटी पहुंचलन. उहां केमिस्ट्री विभाग में गइलन. विभागाध्यक्ष के कमरा बंद रहे. ऊ अर्दली से पुछलन – ‘डॉ.शाही ?’...
Read More– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) सब लोग के पहिला गिलास खतम होखे पर आइल. सबकर नजर जुगेसर के भरल गिलास पर पड़ल. एक साथे सभे बोल उठल – ‘पहिला खतम कइल जाव. फेर इच्छा होई त लेब.’ जुगेसर...
Read More– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) -‘अरे योगेश्वर, कहां घुम तार?’ ऊ कहलन. -‘सर प्रणाम. हम समस्तीपुर जैन स्कूल में ज्वाइन कइले बानी. महीना भर भइल. रउरा कब से हईं इहां?’...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..