लोक कवि अब गाते नहीं – ३
(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) दुसरका कड़ी से आगे….....
Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी अरसा बाद एक बार फिर कलम उठवले बानी, जानत बानी हम आग से बारूद सटवले बानी II दीप क रोशनी से अनंत के नाता बा, अन्हरन से देखे क बात हमारा ना सुहाता बा, हर केहू जान के एक दूसरा के लूट रहल बा, डाकू के मंत्री...
Read More(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) पहिलका कड़ी से आगे….....
Read More– नूरैन अंसारी जब आपन-आपन लोगवा चिन्हाये लागेला. तब स्वर्ग जइसन घरवो बटाये लागेला. जब अबर हो जाला बिश्वास के बरही, तब तिसरइत के हेंगा टंगाये लागेला. लोग भुला जाला जब नेकी के नक्सा, गुलाबो धतूर जइसन बसाये लागेला. जब घर में...
Read More(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) उपन्यास का बारे में...
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