गीत
– रामरक्षा मिश्र विमल १ जे रोअवला के खुशिया मनाई केहू ओकरा के का समुझाई ? लोर रोकले रोकाला ना कतहीं कहीं पूड़ी आ पूआ छनाला कहीं मरघट में बदलेले बगिया कहीं पाटी में बोतल खोलाला जे जहरिये में जिनिगी के पाई केहू ओकरा के का...
Read More– मनोज भावुक दर्द उबल के जब छलकेला गज़ल कहेलें भावुक जी जब-जब जे महसूस करेलें उहे लिखेलें भावुक जी टुकड़ा-टुकड़ा, किस्त-किस्त में जीये-मुयेलें भावुक जी जिनिगी फाटे रोज -रोज आ रोज सियेलें भावुक जी अपना जाने बड़का-बड़का काम...
Read More– आशुतोष कुमार सिंह हर साल आजादी मिलला के खुशी में हमनी के 15 अगस्त के राष्ट्रीय परब के रूप में मनावेनी जा. हमनी के एह 15 अगस्त से ठीक 22995 दिन पहिले अंग्रेजन के गुलामी से आजाद भइल रहनी जा. जवना बेरा हमनी के आजाद भइनी जा...
Read More– जयंती पाण्डेय महंगी के बढ़े में सरकार के कवनो दोष नइखे. महंगी के काम ह बढ़ल. अगर ऊ ना बढ़ी त केहु ओकरा ना चीन्ही, ना पूछी. सोसाइटी में रहे वाला हर बेकती आपन एगो पहचान राखेला. महंगी भी इहे रास्ता पर चलेले. महंगी लोगन के...
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