गीत
– मनोज भावुक बोल रे मन बोल जिन्दगी का ह … जिन्दगी का ह . आरजू मूअल, लोर बन के गम आँख से चूअल आस के उपवन बन गइल पतझड़, फूल -पतई सब डाल से टूटल … साध- सपना के दास्तां इहे , मर के भी हर बार — मन के अंगना में...
Read Moreलखनऊ के भाऊराव देवरस सेवा न्यास पिछला दिने माधव सभागार में युवा साहित्यकारन के पंडित प्रताप नारायण मिश्र स्मृति पुरस्कार से सम्मानित कइलस आ भोजपुरी खातिर ई सम्मान भोजपुरी के युवा गजलकार मनोज भावुक के दिहल गइल. भाऊराव देवरस सेवा...
Read More– मनोज भावुक हजारो सपना सजा के मन में चलत रहेलें मनोज भावुक गिरत रहेलें, उठत रहेलें, बढ़त रहेलें मनोज भावुक एह जिंदगी के सफर में उनका तरह-तरह के मिलल तजुर्बा ओमे से कुछ के ग़ज़ल बना के कहत रहेलें मनोज भावुक ऊ जौन भोगलें, ऊ...
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