दू गो गजल
– रामरक्षा मिश्र विमल 1 शहर में घीव के दीया जराता रोज कुछ दिन से सपन के धान आ गेहूँ बोआता जोग कुछ दिन से जहाँ सूई ढुकल ना खूब हुमचल लोग बरिसन ले ढुकावल जात बाटे फार ओहिजा रोज कुछ दिन से छिहत्तर बेर जुठियवलसि बकरिया पोखरा...
Read More– रामरक्षा मिश्र विमल (1) गीत टनटनात माथ जहर लागेला घाम हाय राम एहू पर दूब के सुतार. रउँदेले सुबह शाम घुमवइया लोग बकरी लगावेलिन ठाकुर के भोग तबहूँ ना कवनो गोहार हाय राम कइसन ई ममता दुलार. बीछे बनिहारिन बेमोह भरल खेत खुरपी...
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