टैग: सत्यनारायण मिश्र सत्तन

स्व. सत्तन के भोजपुरी कविता संग्रह “का हो ! कइसे” के विमोचन

शबद सहारे राखिये, शबद के हाथ न पाँव. एक शबद औषधि बने, एक शबद करे घाव. दीनदयाल विश्वविद्यालय गोरखपुर के हिन्दी विभागाध्यक्ष रहल प्रो. रामदेव शुक्ल कबीरदास के लिखल एह दोहा के दोहरावत कहलन कि स्व. सत्यनारायण मिश्र सत्तन कमे लिखलन...

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भोजपुरी संगम के 75वीं बइठकी

“आजु सत्तन जी हम्मन के बीच नइखीं, आ अपने उहाँ के 75 ले नाइ पंहुचि पवलीं, बाकिर आजु उनके लगावल पेड़ फरत-फुलात बा. आजु हीरक जयन्ती ले पंहुचि गइल बा.” – ई बात गोरखपुर के “भोजपुरी संगम” के 75वीं बइठक के...

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दोकाहें चल गइलन सत्तन

– देवेन्द्र आर्य जाए के उमिरो ना रहल आ अइसन कवनो जल्दबाजिओ ना रहुवे. निकहा नीमन चलत गोष्ठी के परवान चढ़ा, ईद के मुबारकबाद देत आखिरी सलाम क लिहलन. ना दोस्तन के कुछ करे के मौका दिहलन ना घरवालन के. दिल के दर्द के गैस समुझत रह...

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