दू गो छोटहन कहानी
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 14वी प्रस्तुति) – राजगुप्त (एक) पान खइनी, गुटका-गुटकी ट्रेन अपना रफ्तार से दउड़त रहे. गर्मी के दिन ऊपर से बहुते भीड़ि रहे. सज्जी पसिन्जर गर्मी से बेहाल रहले. एही बीचे एगो चना...
Read MorePosted by Editor | Feb 7, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 14वी प्रस्तुति) – राजगुप्त (एक) पान खइनी, गुटका-गुटकी ट्रेन अपना रफ्तार से दउड़त रहे. गर्मी के दिन ऊपर से बहुते भीड़ि रहे. सज्जी पसिन्जर गर्मी से बेहाल रहले. एही बीचे एगो चना...
Read MorePosted by Editor | Feb 5, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 13वी प्रस्तुति) – कृपाशंकर प्रसाद प्रकाश आ हम कइ बेरि होटल में संगे संगे होटलियवले रहनी जा। जब मांसाहार करे के होखे तबे होटलियाईं जा – ‘ई खस बात रहे।’ शुरुए से हम मार्क...
Read More– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” कल्हिए रमेसर काका एगो टाली के परची दे गइल रहुअन. ऊँखी छिलवावे के रहुए ए से आजु सबेरवें ऊँखी छिलवावे खातिर पूरा गाँव की लोग के चला के हमहुँ ऊँखियारी में चलि गउँवीं. रउआँ सभें त जानते बानी की...
Read Moreअतवार २३ जनवरी के बक्सर में आयोजित भोजपुरी संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में बिहार के पूर्व मंत्री श्री अवधेश नारायण सिंह जी के द्वारा “भोजपुरी जन-जागरण अभियान” के चऊथा चरण के उदघाटन करल गईल. उहाँ के एह कार्यक्रम के महत्ता...
Read More