लोक कवि अब गाते नहीं – ६
(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) पँचवा कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं...
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Read More– जयंती पांडेय एकदिन एगो नेताजी अपने दुलरुआ बेटा से पूछले – बाबू रे, तें आगे जा के का बने के चाहऽतारऽ ? माने कि जिनिगी में आगे जा के का करे के इरादा बा ? उनुकर बेटा टप दे कहलसि – बाबूजी, हम त आगा चल के नेता...
Read MorePosted by Editor | Mar 31, 2011 | भोजपुरिया लाल, सरोकार |
आजे का दिन 30 मार्च 2009 के गोंडा का लगे वैशाली एक्सप्रेस में हृदयाघात से डा. प्रभुनाथ सिंह के मौत हो गइल. उहां के दिल्ली से छपरा जात रहनी. ओकरा एके दिन पहिले हमार उहाँ से बातचीत भइल रहे . – ना, अभी हमरा इहां हमार टी वी...
Read More– विकास अजगर करे ना चाकरी पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम ! चलीं तनी एह जानल सुनल कहावत के व्याख्या कइल जाव. सोचल जाव कि आखिर अजगर चाकरी काहे ना करे, पंछी काम काहे ना कर सँ आ आखिर राम का लगे देबे खातिर अतना...
Read Moreदिल्ली के भोजपुरी मैथिली अकादमी द्वारा आयोजित नाट्य समारोह में महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन के लिखल भोजपुरी नाटक “मेहरारुन के दुर्दशा” के मंचन करावल गइल. नाटक के एगो पात्र के सवाल रहे, “ऐ यशोधरा जानत हऊ, सनातन...
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