पत्थर दिल लोगों को भी रुलाया रिंकू घोष ने
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भोजपुरी फिल्मों की स्मिता पाटिल और रेखा मानी जानेवाली नंबर वन अभिनेत्री रिंकू घोष इतनी लाजवाब अभिनेत्री हैं कि उनका अभिनय देख कर पत्थर दिल इंसान भी पिघल जाए. रिंकू घोष की एक फिल्म ‘सईंया ड्राईवर बीबी खलासी’ इन दिनों बिहार में धूम मचा रही है. फिल्म की सफलता का आलम यह है कि रिंकू घोष की अभिनय क्षमता से प्रभावित होकर बिहार के समाचार पत्रों ने पहली बार इस फिल्म को चार स्टार दिया है जबकि भोजपुरी फिल्मों की समीक्षा में चार स्टार नहीं दिये जाते. यही नहीं इस फिल्म के लिए एक खास शो उन पत्थर दिल लोगों के लिए रखे गये थे जो आपराधिक विचारधारा और हिंसावदी थे. शर्त थी कि इस फिल्म को देखते मसय भावुक होकर किसी की आंखें नम नहीं होंगी तो उसे पुरस्कृत किया जायेगा. ऐसे लोगों को रिंकू घोष के हाथों पुरस्कार दिया जायेगा. यकीन मानिये कोई ऐसा नहीं था जो फिल्म में रिंकू घोष का लाजवाब अभिनय देख रो ना पड़ा हो. इस फिल्म में रिंकू घोष ने कमाल की भूमिका निभायी है. रिंकू घोष की भूमिका पर खुद अभिनेता कुनाल सिंह कहते हैं रिंकू घोष ने कमाल की भूमिका निभाया है. फिल्म ‘सईंया ड्राईवर बीबी खलासी’ में. कुनारल सिंह कहते हैं इस फिल्म को देखते समय रिंकू घोष की भूमिका ने मुझे भी रुला दिया था. भोजपुरी फिल्मों की रेखा मानी जाने वाली रिंकू घोष की इस फिल्म को जिसने भी देखा सबका कहना है कि रिंकू ने इस फिल्म में कमाल की भूमिका निभायी है. पैतृक सम्पत्ति में बेटी के अधिकार की बात करनेवाली ये हिंदुस्तान की पहली भोजपुरी फिल्म है. हिंदी में भी इस मुद्दे पर कोई फिल्म मेरी जानकारी में अब तक नहीं बनी है. इतना ही नहीं…. आज पैसा कैसे हमारे रिश्तों की गर्माहट को कम कर रहा है, पैसे के पीछे भागता ये समाज कितना संवेदनहीन हो गया है. ये फिल्म इस विषय पर अच्छे से प्रकाश डालती है. मगर थोड़े से धन के लालच में अपने खून के रिश्ते को ताक पर रख देनेवाले इस समाज में दुलरिया भी है, जिसके लिए रिश्ते अभी भी पैसे से बढ़कर है…..और जो सिर्फ जिंदा रिश्ते ही नहीं, मरे हुए रिश्ते को भी निभा रही है. रिंकू घोष की इस फिल्म ‘सईंया ड्राईवर बीबी खलासी’ फिल्म की वन लाइन कहानी इस तरह है-दुलरिया के पति की हत्या हो जाती है… और उसके पिता उसे मायके वापस ले आते हैं. वहां उसके दो भाई और भाभियां उसे बड़े प्यार से रखती हैं. मगर जैसे ही पिता उसके गुजारे के लिए डेढ़ बीघा ज़मीन दुलरिया के नाम कर देते हैं, वही भाई-भौजाई उसके दुश्मन हो जाते हैं. तरह-तरह के उपाय से उसे घर से दूर कर देना चाहते हैं ताकि उनकी ज़मीन बची रह जाये. मगर वही बहन हर क़दम पर अपने भाई के परिवार के लिए समर्पित रहती है. कुल मिलाकर कहें तो ये फिल्म उस शिकायत को दूर करती है कि भोजपुरी में परिवार के साथ बैठकर देखने लायक अच्छी फिल्म नहीं बनती.


(स्रोत – शशिकान्त सिंह, रंजन सिन्हा)

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