Author: Editor

बतकुच्चन ‍ – ९१

हेलल-हेलल भईंसिया पानी में. पिछला हफ्ता गुजरात के चुनाव के पोस्टपोल सर्वे क बाद मन में ई पुरान गाना गूंज उठल. बाकिर चुनाव-चरचा छोड़ हम सोचे लगनी कुछ अउर. हेलल आ घुसल में कुछ फरक होला कि ना, आ होला त का? अगर गीतकार घुसल-घुसल...

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ई खुलासा काहे ‘खुलल अइसन’ बा ?

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद रामचेला से कहले, अहो भाई. आजु काल्हु एगो बात रोज टी वी पर सुनऽ तानी. ऊ हऽ कि फलनवा के खुलासा हो गइल. ई जे खुलासा शब्द बा ऊ बड़ा डेंजरस होला. हिंदी में एकर माने होला ‘खुलल अइसन’. अब खुलल अइसन आ...

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बतकुच्चन ‍ – ९०

गुजरात चुनाव का गरजा गरजी का बीच हम सोचनी कि हमरा का गरज बा एह में माथ घुसावे के. खास कर तब जब दुनु तरफ से, भा कहीं त तीन तरफ से मूसर गिरत होखे ओखरी में. बाकिर गुजरात चुनाव के एगो बड़हन खासियत बा कि पहिला बेर देश के कवनो राज्य...

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एफ डी आई से नीयत सुधर जाई का हो

– जयंती पांडेय बाबा लसटमा नंद कहले , भाई रामचेला, जान जा कि लक्ष्मी मैया के सवारी तऽ उल्लू हऽ आ रुपिया पइसा के सवारी जरूर भईंसा होई. रामचेला पूछले, कईसे बाबा? काहे कि भईंसा करिया आ बरियार होले सन. जेने जाले सन ओने भीड़ छंट...

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