Author: Editor

लोक बनाम तंत्र का जगहा लोकतंत्र बहाल करे के जरूरत

कहे ला त देश में लोकतंत्र बा माने कि अइसन तंत्र जवन लोक के बनावल, लोग के चुनल, सरकार चलावेले बाकि हकीकत में देखी त आए दिन लोक बनाम तंत्र के कहानी दोहरावत जात रहेला. लोकतंत्र में जनता के आपन विरोध जतावे के पूरा आजादी होखे के...

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बलात्कार, बेहूदगी, आ बकतूत

पिछला दिने दिल्ली में चलत बस में एगो लड़िकी से झुण्ड में बलात्कार कइला का बाद ओकरा के मरल जइंसन हालत में बस से फेंकद दिहल गइल. ओह लड़िकी के अस्पताल में इलाज होखत बा आ ओकर हालत अब मरल कि तब मरल वाला चलत बा. एह मामिला पर चारो तरफ,...

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आरक्षण, गुजरात, आ रहमान मलिक

आजु देश का सोझा तीन गो सवाल बा. आरक्षण, गुजरात आ रहमान मलिक. सबले पहिले तिसरका सवाल. पता ना सरकार का सोच के रहमान के पन्द्रह दिसंबर के बोलवले रहुवे जब गुजरात चुनाव प्रचार अपना जोर पर रहुवे. रहमान के आवग आ गुजरात के चुनाव दुनु...

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बतकुच्चन ‍ – ८९

बबुनी ससुरा ना जाली मने मने गाजेली. भोजपुरी के ई कहाउत आजु कुछ राजनीतिक गोलो पर सही बइठत लागत बा. देश के बड़का पंचायत में दू गो गोल विदेशी किराना बाजार के विरोध कइला का बावजूद ओकरा के आवे से रोके के मौका पर भाग परइले. बहाना बना...

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बतकुच्चन ‍ – ८८

जब कवनो नेता के अपना पार्टी में रहत असकस लागे लागेला त ऊ अइसन अइसन बयानबाजी शुरू कर देला जवना से पार्टी नेतृत्व के अनकस होखे लागे आ ऊ आपन अहजह आ असकत छोड़त ओह नेता के पार्टी से निकाले के फैसला कर लेव आ ओकरा के उभचुभ से बचा लेव....

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