Author: Editor

स्पांसरमय मैं सब जग जानी

– आलोक पुराणिक ई सीन सन् 2508 मतलब कि करीब पांच सौ बरीस बाद के ह. स्पांसरमय सब जग जानी, करहु प्रणाम….. – के वचनोच्चार का बाद संत जालीदास रामकथा कहे के तैयारी शुरु कर दिहले बाड़न. स्पांसर जुटावल जा रहल बा. जालीदास के...

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नरक के समर्थन में नेताजी के नारा

– जयंती पांडेय सड़क दुर्घटना में एगो वरिष्ठ नेता के मृत्यु हो गइल. उनकर देह तऽ खैर देश के अमानत रहे, से चारू ओर शोक मनावल जात रहे लेकिन नेताजी के आत्मा के देवदूत लोग स्वर्ग के दुआर पर ले आई के खड़ा कऽ दिहल लोग. दुअरा पर...

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पत्रकारिता : काल्हु से आजु ले

– आर्य सम्पूर्णानन्द हम लगभग बीस बरिस से पत्रकारिता के अनुभव देखत बानी. तब से अब ले पत्रकारिता में जमीन आसमान के अन्तर आ गइल बा. तब त खादी के कुरता अउरी बगल में गाँधी झोला, इहे असली पत्रकारिता के पहचान रहे. आजु जींस अउरी...

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मऊ के साँच रामलीला

– आर्य सम्पूर्णानन्द शारदीय नवरात्र शुरु होखते जगहे-जगह रामलीला के मंचन शुरु हो जाले अउर दशमी के रावण के मार के दशहरा खूवे धूम धाम से मनावल जाला बाकिर आईं रउआ सभे के मऊ के साँच अउर अलौकिक रामलीला के दर्शन करायीं आ रामजी के...

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गाँवे गइनी गाँव से भगनी

– पाण्डेय हरिराम अक्टूबर का शुरु में गाँव गइल रहीं. सिवान जिला के पचलखी पंचायत के खुदरा गाँव. बड़ बूढ़ बतावेलें कि कबही एकर नाम खुदराज माने सेल्फ गवर्न्ड रहे. अठारहवीं सदी का बादवाला अधिया में गाँव में पंचायती व्यवस्था...

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