Category: सरोकार

का हमनी का एह तंत्र के लोकतंत्र कह सकीलें ?

– पाण्डेय हरिराम सरकार आ जनता के रिश्ता पर बात करे के होखे त बहुते दिक्कत बुझाला. अब परे साल रामलीला मैदान में अधरतिया भइल पुलिस कार्रवाईए के बात लीं. एह पर पिछला बियफे का दिने कोर्ट फैसला सुनवलसि. ई फैसला ओह सबले बड़ सवाल...

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साल २०२५ में कहल जाई : एगो लोक भाषा होखत रहुवे

बाजार के दबाव में तिल-तिल कर के मरत भोजपुरी भाषा के दुर्दशा लेके हम कुछ समय पहिले एगो उपन्यास लिखले रहीं “लोक कवि अब गाते नहीं.” इंडिया टुडे में एकर समीक्षा लिखत मशहूर भाषाविद् अरविंद कुमार तारीफ के पुल बान्हत एगो...

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घाव बड़े काम आ गए – हरिवंश पाठक गुमनाम

पुण्य स्मरण “सूझ बूझ” पत्रिका के दुसरका अंक से पता चलल कि हरिवंश पाठक गुमनाम जी अब नइखीं. मन माने के तइयार नइखे. जहिया ले पढ़ले बानी, आँख भरले रहतिया. भोजपुरी में उहाँ अस गीत आ गजल लिखेवाला कवनो रचनाकार से अभी तक हम...

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