जनभाषा के राजसत्ता कबहियो राजभाषा के दरजा ना देव : नीरन
“जनभाषा कबहियो शासन के भाषा ना होले. राजसत्ता कबहियो जनता के भाषा के राजभाषा के दरजा ना देव. फेर भोजपुरी त लोकभाषा हिय, संवेदना आ प्रतिरोध के जनभाषा. ऊ सरकार के मुँह ना जोहे. अगर संविधान के अठवीं अनुसूची में एकरा जगहा नइखे...
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