Category: भाषा

फार, फारल भा फरला से लगवले फरिअवता भा फरिआवल के चरचा : बतकुच्चन – 197

फार, फारल भा फरला से लगवले फरिअवता भा फरिआवल के चरचा करे चलनी त नीर-क्षीर विवेक के बात धेयान में आ गइल. कहल जाला कि हंस नाम के पक्षी में अतना ज्ञान होला कि ऊ पानी आ दूध के अलग क के दूध त पी बाकिर पानी छोड़ देला. एही से कहल जाला...

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केकरा पर करीं हम गुमान रामप्यारे !

– शिलीमुख उनइस बरिस पहिले हम प्रसिद्ध कवि चन्द्रदेव सिंह क एगो रचना पढ़ले रहलीं. साइत 1997 में “पाती” अंक -२३ में छपल रहे. बरबस आज ओकर इयाद आ गइल बा त रउवो सभे के पढ़ा देत बानी – केकरा प’ करब s गुमान...

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भारत के बढ़न्ती ला भारते के भाषा जरूरी काहे ?

भारतीय जीवन के बहुते खास क्षेत्रन में अंग्रेज़ी भाषा के दखल से भारत के बड़हन नुकसान होखत बा. एह दखल का पाछे सबले बड़हन कारण बा कुछ गलतफहमी जवन हमनी के दिलो-दिमाग में बस गइल बा भा बसा दिहल गइल बा. ई गलतफहमी हई सँ – 1....

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भोजपुरी-वर्तनी के आधार

– स्व. आचार्य विश्वनाथ सिंह (ई दस्तावेजी आलेख एह खातिर दिहल जाता कि भोजपुरी लिखे-पढे़े में लोगन के सहायक-होखो) भोजपुरी भाषा में उच्च कोटि के साहित्य-रचने करे खातिर ना, ओकर सामान्य रूप से पठन-पाठन करे खातिर आ ओकरा के कलम के...

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भोजपुरी भाषी के मातृभाषाई के अस्मिताबोध – 4

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ भाषिक, सांस्कृतिक आ बौद्धिक गुलामी एतना ना मेहीं (बारीक) चीज ह कि एकरा गुलाम का पतो ना चले कि ऊ एह सबके कब से गुलाम बा. ई गुलामी ओकरा उपलब्धि जइसन महसूस होला. ओकरा आगे भाषिक अस्मिताबोध...

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