Category: भाषा

भोजपुरी भाषी के मातृभाषाई अस्मिताबोध – 1

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ ‘अस्मिताबोध’ ओह सग्यानी-स्वाभिमान का होला, जेकरा दिल-दिमाग आ मन-मिजाज में अपना आ अपना पुरखन का उपलब्धियन के लेके मान-गुमान के भाव होखे. एकरा खातिर देश-काल-परिस्थिति के...

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‘हिन्दी डे’ माने ‘हिन्दी-दिवस’ पर ‘भाषा-विचार’

-डाॅ. अशोक द्विवेदी आज दुनिया के बहुते भाषा मर-बिला रहल बाड़ी सऽ. एकर मतलब ई ना भइल कि जवन भाषा कवनो क्षेत्र-विशेष आ उहाँ के जन-जीवन में जियतो बाड़ी सऽ उन्हनियो के मुवल-बिलाइल मान लिहल जाव, जवन आजुओ अपना सांस्कृतिक समाजिक खासियत...

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मातृभाषा के महत्व

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ कवनो व्यक्ति,समाज,देश भा राष्ट्र के बनावे-जनावे के जबरदस्त जरिआ होले ओकर आपन भाषा. ओकर आपन मातृभाषा आ राज/राष्ट्रभाषा. दुनिया के आन देश ओकरा संस्कृति, शिक्षा, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान वगैरह...

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नेट पर भोजपुरी के एगो युग पूरा होखे का मौका पर

आजु से बारह बरीस पहिले भोजपुरी के पहिलका वेबसाइट अंजोरिया डाॅटकाॅम के शुुरुआत भइल रहुवे. तब से आजु ले बहुते कुछ बदल गइल. नेट पर सैकड़ो वेबसाइट हो गइल बाड़ी सँ भोजपुरी के. अलग बात बा कि भोजपुरी में ना चला के ओकनी में से अधिका...

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मिले मियां के माँड़ ना बिरयानी के फरमाईश!

– ओम प्रकाश सिंह अब एहिजा एह कहाउत के संबंध मियाँ लोग से नइखे. मियाँ के मतलब पतिदेव से, आदमी से बा. मियाँ आ बेगम के इस्तेमाल हमेशा से मरद मेहरारू खातिर होखत आइल बा आ एकरा के सेकूलर कमुनल के नजर से देखला के कवनो जरूरत नइखे....

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