Category: भाषा

बतकुच्चन ‍ – ७९

चोट त चोट ह आ कचोट? कचोट के कम चोट समुझे वाला के बुड़बके बुझे के पड़ी. काहे कि कचोट झलके ना भितरे भितर चोट मारत रहेला. देह के चोट त देर सबेर भुलाइओ सकेला आदमी बाकिर मन के चोट, कचोट, भुलावल बहुते मुश्किल होला. आजु जब लिखे बइठल बानी...

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अंगरेजन का समय में त भोजपुरी के सम्मान मिलत लउकल बाकिर….

अंगरेजन का समय में त भोजपुरी के सम्मान मिलत लउकल बाकिर आजादी के बाद से एकर दसा ढंङ से गड़बड़ाइल ह. गोरखपुर में भोजपुरी संगम के इकतिसवीं बइठकी के अध्यक्षता करत ई बाति डा॰ आद्या प्रसाद द्विवेदी जी कहलीं. उहाँ के एगो उदाहरन देत...

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बतकुच्चन ‍ – ७८

ठाँवे-ठाँवे ठठ के ठठ लोग दोसरा के ठोकत-ठेठावत ठाँय-ठाँय करत ठाँव नइखे लेबे देत. संजोग बा दुर्योग से ओहू ठठ के नेता ठए धातु के हउवन स. अब ठए से ठठेरो होला, ठए से ठाकरे आ ठाकुरो होला. ठाकुर के कवनो खास जात ना होखे. बाभनो ठाकुर...

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बतकुच्चन ‍ – ७७

भोजपुरी के पहिला सुपर गायक बलेसर, बालेश्वर राजभर जिनका के लोग बालेश्वर यादव के गलत नाम से बेसी जानेला, के एगो गीत ओह जमाना में बहुत मशहूर भइल रहे. कटहर के कोआ तू खइलऽ त ई मोटकी मुगरिआ के खाई. पिछला दिने मोटा माल के चरचा ढेर चलल...

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बतकुच्चन ‍ – ७६

बारी आ बारी के बाति पिछला बेर बाकी रह गइल रहुवे से ओहिजे से शुरु करत बानी. बारी के एक मतलब होला कतार में पड़ल आदमी भा काम के बारी भा मौका आ दोसर मतलब होला बगइचा. भा समूह. बारी का जगहा कुछ जगहा वारी लागेला . जइसे कि फूल के बगइचा...

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