Category: भाषा

बतकुच्चन २९

आजु जब बतकुच्चन करे बइठनी त मन सरोकार-सरकार-सरकँवासी से सरकत गझिन आ फाँफर पर आ के अटक गइल. सरोकार-सरकार-सरकँवासी पर पहिले बतिया चुकल बानी आ ओकरा के दोहरवला के कवनो जरुरतो नइखे. बाकिर गझिन आ फाँफर के चरचा समय का हिसाबो से फिट...

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बतकुच्चन – २८

प्रकृति के एगो नियम विज्ञान में पढ़ावल जाला कि ऊ गँवे गँवे सब कुछ के समतल सपाट करे में लागल रहेले, चाहे ऊ पहाड़ होखे भा कवनो झील पोखरा गड़हा. अलग बाति बा कि पता ना का होई जब सब कुछ समतल हो चुकल रही. शायद तब धरती पर पानी के प्रलय आ...

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बतकुच्चन – २७

बतबनवा के बतकुच्चन कइल दोसर बाति ह आ घुरचियाह के घुरपेंच बतियावल दोसर. बतकुच्चन करे वाला बाते बात में सामने वाला के कुछ बता देबे के कोशिश करेला. जबकि घुरचियाह आदमी प्रपंची होला आ ओकर घुरपेंच बतियवला के पीछे ओकरा नियत के खोट होला...

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इग्नू में भोजपुरी भाषा में सर्टिफिकेट कार्यक्रम

पहली सितम्बर, 2011 का दिने इग्नू के ” भोजपुरी भाषा, साहित्य संस्कृति केंद्र” के पाठ्यक्रम बनावे खातिर पहिलका बईठक भइल. भोजपुरी भाषा में ‘सर्टिफिकेट कार्यक्रम’ से जुड़ल पाठ लेखकन के एह बईठक में देश के कोना...

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बतकुच्चन – २६

मानत बानी कि बरसात के मौसम बा. कहीं कम त कहीं बेसी बरखा पड़त बा. बाकिर एकर मतलब ई त ना भइल कि सड़कि के कादो पाँकि हँचाड़ खोभाड़ि के चरचा हम सबेरे सबेरे शुरु कर दीं. आखिर हर बाति के एगो आपन समय होला. लेकिन देखत बानी कि बतकुच्चन करे...

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