श्रेणी: पुस्तक चर्चा

भिच्छा

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 15वी प्रस्तुति) – आशारानी लाल जब ना तब हमके बइठल देख के ऊ हमरा सोझा धमक जाले. दूर से चलल-चलल आवेले एही से थाकलो लउकेले. ओकरा तनिको अहस ना होला. इहो ना सोचेले, कि बड़ लोगिन के...

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दू गो छोटहन कहानी

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 14वी प्रस्तुति) – राजगुप्त (एक) पान खइनी, गुटका-गुटकी ट्रेन अपना रफ्तार से दउड़त रहे. गर्मी के दिन ऊपर से बहुते भीड़ि रहे. सज्जी पसिन्जर गर्मी से बेहाल रहले. एही बीचे एगो चना...

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मुंबई में आयोजित भइल भोजपुरी के एगो खास काव्य संध्या

पिछला दिने पहली फरवरी के मुंबई में भोजपुरी के एगो खास काव्य संध्या के आयोजन भइल. खास एह माने में कि मराठी भाषी प्रबुद्ध लोग के मानस के मर्म छू लिहलसि भोजपुरी कविता. आयोजन करवले रहल सामाजिक सांस्कृतिक संस्था “सेतु” आ...

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अनबोलता अँखियन के सवाल

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 13वी प्रस्तुति) – कृपाशंकर प्रसाद प्रकाश आ हम कइ बेरि होटल में संगे संगे होटलियवले रहनी जा। जब मांसाहार करे के होखे तबे होटलियाईं जा – ‘ई खस बात रहे।’ शुरुए से हम मार्क...

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ओनइसवीं सदी में बलिया के ददरी मेला : इतिहास क ऐना

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 12वी प्रस्तुति) – आनन्द संधिदूत ओनइसवीं सदी के आखिरी दशक आवत-आवत ददरी के मेला बलिया में एगो दुर्घटना घट गइल. भइल ई कि कातिक के प्रमुख नहान आ बकरीद एके दिन पड़ गइल. नतीजा ई भइल...

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