श्रेणी: उपन्यास

लोक कवि अब गाते नहीं – १२

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) एगरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं गाँवे से लवटि के लखनऊ चहँपलो पर लोक कवि के शानदार स्वागत भइल. सम्मान मिलला का बाद लोक कवि के भाव अउरियो बढ़ि गइल रहे आ लोक कवि के...

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लोक कवि अब गाते नहीं – ११

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) दसवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सम्मान मिलला बाद अपना गाँवे चहुँपल लोक कवि के एगो पंडित के कहल नचनिया पदनिया के बात कतना खराब लागल रहे. बाकिर चेयरमैन साहब का...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १०

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) नवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सावन का बरखा में राधा में मोहन के रसे रसे बरसल. फेर राधा रुपी धाना के बिआह आन गाँवे होखल, मोहन के अपना गवनई का चलते धीरे धीरे नाम...

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लोक कवि अब गाते नहीं – ९

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) आठवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि सम्मानित भइला का बाद जब लोक कवि अपना गाँवे अइलन त उनुकरा स्वागत में लागल औरतन में उनुकर बालसखी राधो रहली. जेकर असल नाम त रहे...

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