Category: साहित्य

दइब टेढ़ भइले करमवो बा फूटल : गजल

– रामयश अविकल चलीं ई सबुर के बन्हल-बान्ह टूटल कमाये बदे आज घर-गाँव छूटल। मिलल मार गारी, मजूरी का बदला सरेआम अब आबरू जाय लूटल। भवन तीन-महला शहर में बा उनकर हमन के त झाँझर पलनियो ले टूटल। इहाँ दाल-रोटी चलल बाटे मुस्किल दइब...

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भोजपुरी-वर्तनी के आधार

– स्व. आचार्य विश्वनाथ सिंह (ई दस्तावेजी आलेख एह खातिर दिहल जाता कि भोजपुरी लिखे-पढे़े में लोगन के सहायक-होखो) भोजपुरी भाषा में उच्च कोटि के साहित्य-रचने करे खातिर ना, ओकर सामान्य रूप से पठन-पाठन करे खातिर आ ओकरा के कलम के...

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अशोक द्विवेदी के तेवरी

– डा0 अशोक द्विवेदी सुतल बा जागि के जे, ओके का जगइबऽ तूँ ? घीव गोंइठा में भला कतना ले सुखइबऽ तूँ ? बनल बा बेंग इहाँ कतने लोग कुइंयाँ के नदी, तलाब, समुन्दर के, का देखइबऽ तूँ । बा जरतपन के आगि पेट में सुनुगत कबसे उ अगर लहक...

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गज़ल

– डा0 अशोक द्विवेदी हुक्मरानन का खुशी पर फेरु मिट जाई समाज अपना अपना घर का आगा, खोन ली खाई समाज । कर चुकल बा आदमी तय सफर लाखन कोस के घूम फिर के कुछ समय में, का उहें आई समाज ? जुल्म से भा जबरजस्ती ना बसे बस्ती कहीं बसी त...

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गज़ल : उरुवा लिखीं, उजबक लिखीं कि बेहया लिखीं

– डा0 अशोक द्विवेदी एह बेशरम-अनेति पर अउँजा के, का लिखीं उरुवा लिखीं, उजबक लिखीं कि बेहया लिखीं लंपट आ नीच लोग बा इहवाँ गिरोहबन्द सोझबक शरीफ के बा बहुत दुरदसा लिखीं लँगटे-उघार देहि से, दिल से दिमाग से अइसनका लोग ढेर बा,अब...

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