नवगीत
– गंगा प्रसाद अरुण संता, जाने कइसन महभारत फेर आइल बाटे चकराबिहू रचाइल बाटे ना! केकर कइसे गोड़ कबारीं केकरा के कइसे हम जारीं डेगे-डेग इहाँ पर लाखा-घर सिरजाइल बाटे चकराबिहू रचाइल बाटे ना! अनकर अस्तर-सस्तर बोले बीचे धरम-जूझ...
Read More– विजय मिश्र लइका हनेला जवाब, अब सयान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो गइल. पहिला रिस्ता टूटल जाता, नवका रोज धराता ननिअउरा त याद ना आवे, बढ़ल सढ़ुआ नाता. माई बाबू काटे, ससुररिया परान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो...
Read More– डा॰ शत्रुघ्न पाण्डेय, बाबूजी के हम रहुईं आँखि के पुतरिया राखसु करेजवा में मोर महतरिया आवते ससुरवा अघोरनी रे, सासु कहे कुलबोरनी. हवे मतवाली ह कुलछनी मतहिया सासुजी कहेली खेलवाड़ी ह भुतहिया परल कपार बिया चोरनी रे, सासु कहे...
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