दू गो गजल
– रामरक्षा मिश्र विमल 1 शहर में घीव के दीया जराता रोज कुछ दिन से सपन के धान आ गेहूँ बोआता जोग कुछ दिन से जहाँ सूई ढुकल ना खूब हुमचल लोग बरिसन ले ढुकावल जात बाटे फार ओहिजा रोज कुछ दिन से छिहत्तर बेर जुठियवलसि बकरिया पोखरा...
Read More– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” हो रहल बा भारत निरमान, गा रहल बा सब केहू गुनगान, 100 में हो गइने 99 बेइमान, तब्बो आपन देस बहुत महान. हो रहल बा भारत निरमान. महँगाई के राज हो गइल बा, अधिकन के त भागि खुलि गइल बा, सूना हो गइल...
Read More– ओ.पी. अमृतांशु टपऽ- टपऽ चुअता पसेनवा हायॅ राम भइल बा उखमवा ! चैन बा दलानी नाहीं बाग-फुलवारी, लेई लुकवारी धावे पछुआ बेयारि, उसिनाई गइल बा परानवा हायॅ राम भइल बा उखमवा ! पोखरा – ईनरवा के होठवा झूराई गइल,...
Read More– रामरक्षा मिश्र विमल (1) गीत टनटनात माथ जहर लागेला घाम हाय राम एहू पर दूब के सुतार. रउँदेले सुबह शाम घुमवइया लोग बकरी लगावेलिन ठाकुर के भोग तबहूँ ना कवनो गोहार हाय राम कइसन ई ममता दुलार. बीछे बनिहारिन बेमोह भरल खेत खुरपी...
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