श्रेणी: कविता

गीत

– डा॰अशोक द्विवेदी रतिया झरेले जलबुनिया फजीरे बनि झालर, झरे फेरु उतरले भुइयाँ किरिनिया सरेहिया में मोती चरे ! सिहरेला तन, मन बिहरे बेयरिया से पात हिले रात सितिया नहाइल कलियन क, रहि-रहि ओठ खुले फेरू पंखुरिन अँटकल पनिया चुवत...

Read More

दू गो कविता

– डा॰अशोक द्विवेदी गोहिया मार चाहे सटहा के होखे चाहे जहर बुझल बात के मार से पीठि पर उखड़ल गोहिया त लउकेला बाकि मन पर परल करिया रेघारी भा अन्तर में उखड़ल गोहिया ना लउके ना लउके दुर्दिन आ दुर्भाग में लागल गहिर ठेस. बोझा बोझा...

Read More

ए माई !

– ओ.पी. अमृतांशु नवमी के दिने देवी लेली बलिदनवा, खस्सिया पे चले तलवार होऽऽऽ. करेले बकरिया गोहारऽ ए माई, करेले बकरिया गोहार होऽऽऽ. बड़ी रे ललसवा से दिहलीं जनमवा, चुमी-चाटी बबुआ के संझिया-बिहनवा,...

Read More

राजा आ लोक कवि

– डा॰अशोक द्विवेदी सिंहासन पर बइठल राजा के अझुराइल रहला खातिर जुटावल जाला कतने सरंजाम. जइसे मारकाट के खेल भुखाइल, खूनी बाघ से निहत्था आदमी क लड़ाई. जइसे नाच गाना के महफिल आ शेरो-शायरी से बड़ाई खास नर्तकियन के पेशी. पाँच...

Read More

हजार का नोट पर छाप दिहल गाँधी

– शैलेश मिश्र हम अन्ना ना भारत सरकार के समर्थक हईं करोड़ो का आबादी में बेबस बेकार हईं जनम से आजुले भठियरपन के संरक्षक हईं. जनम लिहनी त नर्स मँगलसि चार आना डाक्टर बर्थ सर्टिफिकेट ला लिहले फेर चार आना. स्कूल में नाम लिखाई में...

Read More

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..