भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 2
– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) -‘अरे योगेश्वर, कहां घुम तार?’ ऊ कहलन. -‘सर प्रणाम. हम समस्तीपुर जैन स्कूल में ज्वाइन कइले बानी. महीना भर भइल. रउरा कब से हईं इहां?’...
Read More– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) -‘अरे योगेश्वर, कहां घुम तार?’ ऊ कहलन. -‘सर प्रणाम. हम समस्तीपुर जैन स्कूल में ज्वाइन कइले बानी. महीना भर भइल. रउरा कब से हईं इहां?’...
Read Moreपिछला दिने कोलकाता में केन्द्रीय सचिवालय हिंदी परिषद नयी दिल्ली के कोलकाता ईकाई का तरफ से हरेन्द्र कुमार जी के उनकर बहुचर्चित भोजपुरी उपन्यास “सुनीता सान्याल के डायरी” खातिर स्व॰ बी॰पी॰श्रीवास्तव स्मृति पुरस्कार से...
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