Tag: भोजपुरी

आऊ रे नींदिया नींदरवन से…

– आशुतोष कुमार सिंह पिछला रात हम नीमन से सुत ना पइनी. अंघीए ना लागल. घर से लेके दफ्तर तक के टेंशन हमरा नींद में बाधा उत्पन्न क देले रहे. रात में जब हमरा नींद ना आवत रहे तब हम ई सोचत रहीं कि ऊ दिन केतना नीमन रहे, जब चांद के...

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नीमिया रे करूवाइन

– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन ह. जेकरा आँखि से इहां का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हंसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन जनाला कि किछु हेरा गइल बा, ओके खोजे में अदीमी रात-दिन एक कइले रहेला. निकहा...

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राम जी के चिरई राम जी के खेत…

– आशुतोष कुमार सिंह राम जी के चिरई, राम जी के खेत. खा ल चिरई भर-भर पेट. ई लाइन हमनी का लइकाइएं से सुनत आ रहल बानी जा. एह लाइन प धेयान से सोचला प ई महसूस होखेला कि ई एगो पंक्ति में हमनी के संस्कार आ संस्कृति के सार छुपावल...

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पलायन

– संतोष कुमार पटेल बाढ़, सुखाढ़ आ रोटी अजीब रिश्ता बा इनके जवन खरका देलख खरई खरई जिये के विश्वास साथे रहे के आस धकेल देलस दउरत रेल के डिब्बा में जहवां न बइठे क जगहे न साँस लेवे के साँस ऊँघत जागत दू दू रात के आँखिन में काटत...

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एगो मजदूर के दरद

– प्रभाकर पाण्डेय ‘गोपालपुरिया’ नून-तेल-भात कबो, कबो दलिपिठवा, कबो-कबो खाईं हम भुँजा अउरी मिठवा, कबो लिट्टी-चोखा त कबो रोटी-चटनी, कई-कई राति हम बिना खइले कटनी. कबो मिलि जाव एक मुठी सतुआ, कबो-कबो खिचड़ी खिया दे...

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