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पाती के चौहत्तरवाँ अंक का बहाने कुछ मन क बात

– अशोक द्विवेदी पत्रिका के 74वाँ अंक रउवा सभ के सामने परोसत हम अपना स्रम के बड़भागी मान रहल बानी जे 1979 से जूझत-जागत, ठोंकत-ठेठावत हमनी का पैंतीसवाँ बरिस में चलि अइली जा। एह यात्रा में, सँग-सँग कुछ डेग चले वाला हर...

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भोजपुरी साहित्यकार डा॰ अशोक द्विवेदी के मिली “लोककवि सम्मान”

पंडित विद्यानिवास मिश्र के जयंती का मौका पर 14 जनवरी 2015 का दिने भोजपुरी के महान साहित्यकार डा॰ अशोक द्विवेदी के ‘लोककवि सम्मान’ से सम्मानित कइल जाई. पंडित विद्यानिवास मिश्र के स्मृति में दिहल जाए वाला पुरस्कार...

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जिए भोजपुरी ! बाकिर जिए त जिए कइसे?

भोजपुरीए ना हिन्दीओ पत्रिकन के प्रकाशन आजुकाल्हु मुश्किल हो गइल बा काहे कि एक त लोग पढ़े के आदत छोड़ दिहले बा आ दोसरे किताब खरीदे के. रोज रोज के खरचे जुटावल जब मुश्किल बनल होखे त किताब भा पत्र-पत्रिकन के के खरीदो. बाकिर सवाल बा...

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मंत्री जी भोजपुरी का बारे में रउरा वादा के का भइल?

एक साल पहिले अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के रजत जयन्ती अधिवेशन पटना में 28-29 दिसंबर 2013 के करावल गइल रहे. तब एह मौका पर ओह घरी भाजपा के महासचिव रहल रविशंकर प्रसाद कहले रहले कि, ‘ई भाषा के मिठास सबके दिल जीत लेला....

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औरत आ जुआ

– डॉ॰ उमेशजी ओझा औरत आपन पुरा उमिर अपने-आप के सुहरावे आ सम्हारे में परेशान रहेली. काहे कि हमनी के पुरूष प्रधान देश में औरतन के डेग-डेग प आहत कइल जाला. ई लोग समाज में आर्थिक नजर से अपना पति भा कवनो मरद प निर्भर रहे वाली...

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