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कालाधन बैंक में लुकाइल बा त कवन आश्चर्य

– जयंती पांडेय किताबन में, मय अखबारन में पढ़ले बानी कि संसद के एक दिन के कार्रवाई में कई लाख रुपया खर्चा होला. लेकिन बाबा तूं बतावऽ कि कालाधन आउर कई गो मामूली बात खातिर सांसद लोग संसद के कार्यवाही ना चले देला, आ कामकाज ठप...

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भौकाली

– अशोक द्विवेदी उहो बजावे ले एकतारा ! तुलसी, सूर प’ मूड़ी झाँटसु ले कबीर के नाँव, सरापसु भदभाव के टाफी चाभत कबिता कहनी लीखसु नारा ! उहो बजावे ले एकतारा ! पढ़सु फारसी, बेचस हिन्दी उर्दू में अंगरेजी बिन्दी अनचितले जब...

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भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक

बावन पेज के पत्रिका, चार पेज विज्ञापन के, चार पेज संपादकीय सामग्री, बाँचल चउवालीस पेज. तरह तरह के तेरह गो संपादक बाकिर प्रूफ आ भाषा के गलतियन के भरमार का बीच भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक में भोजपुरी में मिलल...

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पुरवइया आ भोजपुरी लेखक संघ के भोजपुरी कविता संगोष्ठी

पिछला दिने 23 नवंबर के दिल्ली के पालम में बोलावल गइल भोजपुरी कविता गोष्ठी के अध्यक्षता करत डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना जब आपन पंक्ति सुनवनी कि, राजघाट पर गीता कुरान लेके जे किरिया खाई उहे लोग सत्ता पाई, उहे लोग सता पाई ! त सभे लोग...

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बेइज्जत करे खातिर इज्जत भइल

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद देश के राजनीति ले के बड़ा हरान बाड़े. जब देखऽ तब कवनो ना कवनो बात ले के चर्चा करत रहेले. बाबा रामचेला के बोला के कहले कि, जान जा रामचेला आजुकाल बड़ा कठिन स्थिति बा. अब दू दिन पहिले के बात ह कि...

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