कुलछनी
– डॉ॰ उमेशजी ओझा नीलम के गोड़ धरती प ना पड़त रहे. खुशी के मारे एने से ओने उछलत कुदत चलत रही. एह घरी के सभ लइकी आ लइका के बड़ी इन्तजार रहेला. नीलमो आखिर उछल कुद काहे ना करस. उनकर बिआह जे ठीक भइल रहे. नीलम के मन में खुशी के...
Read More– जयंती पांडेय रामचेला एगो कागज हाथ में ले ले रहले. ओहमें कुछ लिखल रहे. ऊ कागज के रामचेला बाबा लस्टमानंद के देखवले. बाबा कहले ई सर्वे हऽ एह में लिखल बा कि मेहरारू सब दिन में माने कि 12 घंटा में 5 घंटा खाली बतियावेली सन....
Read MorePosted by Editor | Oct 22, 2014 | पुस्तक चर्चा, सरोकार |
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित भोजपुरी समाज दिल्ली के एगो कार्यक्रम में काल्हु 21 अक्टूबर 2014 के समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे के लिखल हिन्दी किताब “तलाश भोजपुरी भाषायी अस्मिता की” के विमोचन कइल गइल. एह मौका प स्वाभाविक रूप से...
Read More– ओेमप्रकाश अमृतांशु शंख नाद गरजन सुनावऽ, मिलके जोर लगावऽ आवऽ दियावा जरावऽ, भोजपुरी के भईया . ओका-बोका तिन तड़ोका, घुघुआ के हई माना तार काटो-तरकुल काटो, ढ़ेरन खेल-खजाना, चुट्टा-चुट्टी, बुढ़िया कब्ड्डी, से नेहिया लगावऽ आवऽ...
Read More– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद मोदी के झाड़ू देवे वाला खबर पढ़ि के रामचेला से कहले, जवना झाड़ू से झड़ुआवे के रजमतिया के माई गारी दे ले तवने झाड़ू के अइसन फैशन आ जाई ई त केहु सोचलहीं ना रहे. ई झाड़ू के जबले घर के मेहरारू...
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