Tag: भोजपुरी

नेताजी के कटहर चोरी भइल

– जयंती पांडेय नेताजी भाजपा के हाहर में जीत गइले आ मंत्रियों हो गइले. जहां उनका बंगला मिलल ओह में एगो कटहर के पेड़ रहे. मंत्री जी रोज सबेरे उठि के गाछ पर के कटहर गिनस. एक दिन अचके में लगले चिलाये कि गाछि पर काल्हु ले एगारह...

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सखी

– डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना लोर से भरल आँख अउरी मुँह पर पसरल उदासी साफ साफ झलका देला कि कवनो परानी दुख में केतना गोताइल बा. बेयाकुल चिरई के बोली में चहचहाहट ना होला, बस बुझवइया के समझला के फेर हऽ. एही लेखा-जोखा में नीतू के...

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अंधेर नगरी माने बिजली के बिना शहर

– जयंती पांडेय रामचेला लइकन के बतावत रहले कि अंधेर नगरी के माने का होला. ओकरा खातिर जरूरत होला चौपट राजा के. बिना चौपट राजा के अंधेर नगरी होइये ना सके. तले बाबा लस्टमानंद कहले हो राम चेला ई कहानी सब पुरान जमाना के ह आ...

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ई अंगरेजी हऽ जहाँ चाचा मामा फूफा सभे के अंकल कहाला

– जयंती पांडेय लस्टमानंद के नतिया लोअर इस्कूल में पढ़त रहे आ कहत रहे अंकल माने चाचा, मामा, फूफा. उनका आपन दिन याद आ गइल. उहो त इहे पढ़ल रहले. जब ऊ पढ़त रहले त अंग्रेजी पढ़ल मास्टर के बड़ा रुतबा रहे. ऊ मैट्रिक पास रहे बाकी...

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लोके आ लपके के फरक (बतकुच्चन 157)

कहल गइल बा कि बीत गइल तवन बात गइल. बाकिर का ई सचहू एतना आसान होला? बीते ला त चुनाव बीतिए नू गइल बाकिर ओकर फल अब खट्टा निकले भा मीठ पता ना कतना साल ले खाए के पड़ी. जीते वाला त जीत गइल बाकिर कुछ लोग जीतिओ के ना जीतल. सपना सपने रहि...

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