सुबरन को ढूंढ़त फिरे कवि कामी और चोर (बतकुच्चन – 199)
भोजपुरी के एगो महान कवि रहलन महेन्दर मिसिर. उनुका के पूरबी गीतन के जनक मानल जाला. मिसिर जी के लिखल पूरबी अपना शृंगार रस का चलते बहुते लोकप्रिय भइली सँ. ओहि गीतन में से एगो गीत रहुवे – अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया रे ननदी,...
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