आधुनिक नारी
– लाल बिहारी लाल कवन भूल भइल हमसे भारी विधाता दिहल तू अइसन नारी बात-बात पर गाल बजावे कह कछुओं तS आंख देखावे कलजुग के अइसन नारी विधाता दिहल तू…….. गहना किन तS खुस हो जाली सारी किन तS उS बरी सरमाली बुझसS ना कवनो...
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