भिच्छा
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 15वी प्रस्तुति) – आशारानी लाल जब ना तब हमके बइठल देख के ऊ हमरा सोझा धमक जाले. दूर से चलल-चलल आवेले एही से थाकलो लउकेले. ओकरा तनिको अहस ना होला. इहो ना सोचेले, कि बड़ लोगिन के...
Read MorePosted by Editor | फरवरी 7, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 15वी प्रस्तुति) – आशारानी लाल जब ना तब हमके बइठल देख के ऊ हमरा सोझा धमक जाले. दूर से चलल-चलल आवेले एही से थाकलो लउकेले. ओकरा तनिको अहस ना होला. इहो ना सोचेले, कि बड़ लोगिन के...
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