रहे एगो आस रे…
– ओमप्रकाश अमृतांशु डहके मतरिया रे , छछनेली तिरिया, बाबुजी बांधत बाड़न, बबुआ के लाश रे, जिनिगी के जिनिका पे रहे एगो आस रे. ढरकत लोरवा के छोरवा ना लउके, भइल सवार खून माथवा पे छउंके, पारा-पारी सभेके धोआइल जाता मंगिया, बाबुजी...
Read More– ओमप्रकाश अमृतांशु डहके मतरिया रे , छछनेली तिरिया, बाबुजी बांधत बाड़न, बबुआ के लाश रे, जिनिगी के जिनिका पे रहे एगो आस रे. ढरकत लोरवा के छोरवा ना लउके, भइल सवार खून माथवा पे छउंके, पारा-पारी सभेके धोआइल जाता मंगिया, बाबुजी...
Read More– ओमप्रकाश अमृतांशु कि आरे झुरू -झुरू बहेला फगुनवा , सगुनवा लेइके बा आईल. लाल -पियर शोभेल गगनवा , धरती के चुनरी रंगाईल. {1} आमवा से अमरित टपके , चह-चह चहके चिरइयाँ. महुआ सुगंध में मातल, कुकू -कुकू कुकेले कोइलिया . कि आरे...
Read More– ओमप्रकाश अमृतांशु हम बच्चा दिल के सच्चा आईऽ गइलीं शरण में . हे ! विद्या के भंडारिणी , द नव कृपा कृपालिनी , बुद्धि – सद्बुद्धि कर द हमरो , हे माँ ! वीणावादिनी . तू दानी हे! वरदानी आईऽ गइलीं शरण में . हमहूँ ज्ञानी...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..