अब त चिरईओ ना बोले
– डा॰ कमलेश राय सबरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. अब त चिरईओ ना बोले सबेर भोरे. सगरो बिछल अस कारी रइनिया सकुचि सकुचि उगे सुरुज किरिनिया फुलवा पँखुरओ ना खोले, सबेरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. उजरि गइल सब महुआबारी, निबियो ना...
Read More– डा॰ कमलेश राय सबरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. अब त चिरईओ ना बोले सबेर भोरे. सगरो बिछल अस कारी रइनिया सकुचि सकुचि उगे सुरुज किरिनिया फुलवा पँखुरओ ना खोले, सबेरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. उजरि गइल सब महुआबारी, निबियो ना...
Read More– डा॰ कमलेश राय हम अइना हर आँगन क हर चेहरा के रखवार हईं राख सहेज त एगो हम, तोरऽ त कई हजार हईं. हिय में सनेह से राखी लां दुख के पीड़ा सुख के उछाह निरखी ला रोज थिर रहि के, जिनिगी के सगरी धूप छाँह. छन में अधरन के मीठ हँसी, खन...
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